उत्तराखंड के जंगलों को धधकने से बचाने और वनाग्नि (Forest Fire) पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए वन विभाग ने एक अनूठी प्रोत्साहन योजना तैयार की है। इस योजना के तहत जंगलों की आग बुझाने में उत्कृष्ट योगदान देने वाले जांबाजों को 'फॉरेस्ट फायर फाइटर' के रूप में नकद पुरस्कार और सम्मान से नवाजा जाएगा। प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने घोषणा की है कि राज्य के हर जिले से तीन-तीन सर्वश्रेष्ठ काम करने वाले लोगों या समूहों को चुना जाएगा। इसमें सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ स्थानीय जनता और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बराबर का मौका मिलेगा।
उत्तराखंड में हर साल जंगलों में लगने वाली आग वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनती रही है। हालांकि वर्ष 2026 में पिछले वर्षों की तुलना में वनाग्नि की घटनाएं अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई हैं, लेकिन बढ़ते तापमान के बीच आने वाले दिनों में जंगलों में आग लगने का खतरा अभी भी बरकरार है। ऐसे में वन विभाग ने वनाग्नि पर प्रभावी नियंत्रण और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए एक नई और प्रेरणादायक योजना शुरू की है। प्रदेश सरकार अब जंगलों की आग बुझाने में अहम भूमिका निभाने वाले लोगों और कर्मचारियों को सम्मानित करेगी। नई प्रोत्साहन योजना के तहत उत्तराखंड के हर जिले से तीन-तीन “फॉरेस्ट फायर फाइटर” चुने जाएंगे, जिन्हें नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य वन विभाग के कर्मचारियों के साथ-साथ आम जनता को भी जंगलों की सुरक्षा के लिए प्रेरित करना है। वन विभाग के अनुसार, जंगलों में आग लगने के दौरान स्थानीय लोग सबसे पहले मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में मदद करते हैं। कई बार ग्रामीण और स्वयंसेवी समूह अपनी जान जोखिम में डालकर जंगलों को बचाने का प्रयास करते हैं। इसी जनसहभागिता को मजबूत करने के लिए विभाग ने सरकारी कर्मचारियों और आम नागरिकों के लिए अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार तय किए हैं। नई योजना के तहत वनाग्नि सीजन समाप्त होने के बाद प्रत्येक जिले से तीन सरकारी कर्मचारियों और तीन आम नागरिकों या समूहों का चयन किया जाएगा। चयनित लोगों को उनके उत्कृष्ट कार्य के आधार पर सम्मानित किया जाएगा। प्रथम स्थान प्राप्त करने वालों को एक लाख रुपए, द्वितीय स्थान पाने वालों को 75 हजार रुपए और तृतीय स्थान पर चयनित लोगों को 51 हजार रुपए की नकद राशि दी जाएगी। वन विभाग ने चयन प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। विभाग उन कर्मचारियों और नागरिकों के कार्यों का मूल्यांकन कर रहा है जिन्होंने वनाग्नि के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई और जंगलों को बड़े नुकसान से बचाने में मदद की। विभाग का मानना है कि यह पहल न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाएगी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को भी वन संरक्षण के लिए आगे आने को प्रेरित करेगी। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जंगलों की आग को शुरुआती स्तर पर नियंत्रित करना सबसे जरूरी होता है और इसमें स्थानीय समुदाय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि ग्रामीण और स्थानीय लोग समय रहते आग बुझाने में सहयोग करें तो बड़े स्तर पर होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने भी इस योजना की पुष्टि करते हुए कहा कि हर जिले में तीन-तीन पुरस्कार दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 75 हजार और तृतीय पुरस्कार के रूप में 51 हजार रुपए की धनराशि दी जाएगी। यह सम्मान सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ निजी और सामाजिक स्तर पर सहयोग करने वाले लोगों को भी प्रदान किया जाएगा। सरकार की इस नई पहल को वन संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इससे प्रदेश में वनाग्नि की घटनाओं पर तेजी से नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी और जंगलों की सुरक्षा में आम जनता की भागीदारी और अधिक मजबूत होगी।