Jul 22, 2026

विवाद के बाद जेपीएससी का बड़ा फैसला: मुख्य परीक्षा के साथ सभी प्रस्तावित परीक्षाएं स्थगित

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रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राज्य के सबसे बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों में बदल गया है। प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के परिणाम पर उठे सवाल, अभ्यर्थियों के लगातार प्रदर्शन, विपक्ष के विरोध और आयोग के अध्यक्ष एल. ख्यांगते के इस्तीफे के बाद जेपीएससी ने बड़ा फैसला लेते हुए मुख्य परीक्षा सहित अपनी सभी प्रस्तावित परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। आयोग के इस निर्णय से हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर फिलहाल अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। जेपीएससी की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 25 से 27 जुलाई 2026 तक प्रस्तावित झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य (लिखित) प्रतियोगिता परीक्षा-2025 को अपरिहार्य कारणों से स्थगित किया गया है। इसके साथ ही 9 जुलाई 2026 को जारी परीक्षा कैलेंडर में शामिल शेष सभी प्रस्तावित परीक्षाओं के कार्यक्रम भी अगले आदेश तक टाल दिए गए हैं। नई परीक्षा तिथियों की घोषणा बाद में की जाएगी।

विवाद की शुरुआत 19 अप्रैल 2026 को आयोजित 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम से हुई। आयोग ने 2 जुलाई 2026 को पीटी परीक्षा का परिणाम घोषित करते हुए 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया था। परिणाम जारी होते ही बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग ने कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए, ओएमआर शीट में कथित गड़बड़ियां हुईं और मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही। इन आरोपों के बाद छात्र संगठनों ने आयोग के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया और परिणाम की निष्पक्ष जांच, उत्तर पुस्तिकाओं की समीक्षा तथा चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। देखते ही देखते मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा। भारतीय जनता पार्टी और भारतीय जनता युवा मोर्चा ने आयोग और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। रांची सहित कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। भाजयुमो ने मशाल जुलूस निकाला और बाद में जेपीएससी कार्यालय का घेराव कर परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। इसी दौरान जेपीएससी कार्यालय में सीआईडी और रांची पुलिस की गतिविधियों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि, इस संबंध में न तो सीआईडी, न रांची पुलिस और न ही जेपीएससी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। ऐसे में जांच की स्थिति को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। विवाद के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब जेपीएससी अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि आयोग की ओर से उनके इस्तीफे के कारणों का औपचारिक खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन इसे पूरे विवाद के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक दल और अभ्यर्थी इस घटनाक्रम को परीक्षा विवाद से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि आधिकारिक स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है। मुख्य परीक्षा और अन्य सभी प्रस्तावित परीक्षाओं के स्थगित होने से राज्यभर के हजारों अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवार अब नई परीक्षा तिथियों की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि अनिश्चितता के कारण उनकी तैयारी और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। फिलहाल जेपीएससी विवाद झारखंड की सबसे चर्चित प्रशासनिक और राजनीतिक बहस बन चुका है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार, आयोग और संबंधित जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विवाद की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, आयोग पारदर्शिता को लेकर क्या कदम उठाता है और स्थगित परीक्षाओं का नया कार्यक्रम कब जारी किया जाता है। इन फैसलों पर ही हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य और राज्य की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रिया की आगे की दिशा निर्भर करेगी।