Jun 10, 2026

कौशलपुर गांव ने वैज्ञानिक डॉ. शुभम चमोला की अंतरराष्ट्रीय सफलता का किया उत्सव

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उत्तराखंड की शांत वादियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक क्षितिज पर अपनी चमक बिखेरने वाले युवा वैज्ञानिक डॉ. शुभम चमोला ने एक बार फिर देवभूमि का मान वैश्विक पटल पर बढ़ाया है। जनपद रुद्रप्रयाग के बसुकेदार क्षेत्र के अंतर्गत कौशलपुर गांव के मूल निवासी डॉ. शुभम चमोला को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान  जोधपुर के 12वें दीक्षांत समारोह में समग्र विज्ञान (साइंसेज) के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट और अभूतपूर्व शोध कार्य के लिए देश के बेहद प्रतिष्ठित 'सीवी रमन गोल्ड मेडल' से नवाजा गया है।

यह ऐतिहासिक सम्मान उन्हें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ तथा प्रख्यात अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्रा द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया गया। इस गौरवशाली क्षण के दौरान IIT जोधपुर के निदेशक प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल और उपनिदेशक प्रो. भबानी कुमार सतपथी सहित देश-विदेश के कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और शिक्षाविद मौजूद रहे। डॉ. शुभम चमोला राजकीय इंटर कॉलेज, चंद्रापुरी में अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर कार्यरत ओमप्रकाश चमोला के सुपुत्र हैं। एक बेहद साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाले शुभम ने अपनी कड़ी लगन, अटूट मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर इस मुकाम को हासिल किया है। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता से पूरे रुद्रप्रयाग जिले और उत्तराखंड में हर्ष का माहौल है। डॉ. शुभम का शोध कार्य ऊर्जा विज्ञान और सतत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में क्रांतिकारी माना जा रहा है। उनका अनुसंधान मुख्य रूप से सौर ऊर्जा के संग्रहण तथा ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को अधिक प्रभावी, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर केंद्रित है। वरिष्ठ वैज्ञानिकों का मानना है कि शुभम का यह शोध भविष्य की हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में दुनिया की मदद करेगा। अपनी इस यात्रा के दौरान डॉ. शुभम को भारत सरकार की प्रतिष्ठित इंस्पायर स्कॉलरशिप एवं फेलोशिप और कॉमनवेल्थ फेलोशिप भी मिल चुकी है। उन्होंने ब्रिटेन की विश्व प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज में लगभग एक वर्ष तक उन्नत ऊर्जा प्रौद्योगिकी पर शोध किया। इसके अलावा, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस सहित कई देशों में अपने शोध पत्रों की शानदार प्रस्तुति के लिए उन्हें चार बार 'बेस्ट प्रेजेंटेशन अवॉर्ड' से भी सम्मानित किया जा चुका है। अपनी इस बड़ी उपलब्धि पर डॉ. शुभम चमोला ने कहा, "पीएचडी की यह यात्रा अनगिनत प्रयोगों, चुनौतियों और असफलताओं से सीखने का अनुभव रही है। यह सम्मान वर्षों के समर्पण और वैज्ञानिक जिज्ञासा का परिणाम है। स्थानीय प्रबुद्धजनों का कहना है कि डॉ. शुभम ने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर किए जाएं, तो पहाड़ों के सीमित संसाधन कभी भी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकते। वैज्ञानिक समुदाय को उम्मीद है कि उनका यह सफर उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बनेगा।